उठो, अपने जीवन की योजना बनाओ ताकि तुम्हारी सोई हुई महान प्रतिभा और शक्ति जो अब तक व्यर्थ पड़ी हुई है जाग उठे। आप अपने सबसे बड़े गुरु व निर्देशक है। पहले आप अन्दर मजबूती लाइए। अपने विचारो को दृढ़ कीजिए। इस दुनिया में किसी भी व्यक्ति का स्वभाव प्राकृतिक रूप से ऐसा नहीं है जिसे कम्पलीट कहा जा सके। उसे आवश्यकता होती है – देखभाल की, आत्मसंयम की। जिस प्रकार अलमस्त हाथी पर काबू पाने के लिए महावत अंकुश का प्रयोग करता है। उसी प्रकार को अपनी दूषित भावनाओं पर काबू पाने के लिए आत्मसंयम रूपी अंकुश का इस्तेमाल करना चाहिए। अवसर से लाभ उठाने में असाधारण रूप से वाही लोग सफल हुए है। जिन्होंने प्राप्त अवसरों में सुधार लाकर उन्हें अपने अनुकूल बनाने का प्रयत्न किया। यदि कष्ट को हँसते हँसते सहन किया जाये तो वह भी सुखद हो जाता है। पर यह तभी हो सकता है जब काम को महान बना दिया जाये।
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है
तू चल, तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है…….
जो तुझ से लिपटी बेड़ियाँ
समझ ना इनको वस्त्र तू
जो तुझ से लिपटी बेड़ियाँ
समझ ना इनको वस्त्र तू
ये बेड़ियाँ पिघाल के
बना ले इनको शस्त्र तू
बना ले इनको शस्त्र तू…….
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है
तू चल, तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है…….
चरित्र जब पवित्र है
तो क्यूँ है ये दशा तेरी
चरित्र जब पवित्र है
तो क्यूँ है ये दशा तेरी
ये पापियों को हक़ नही
कि लें परीक्षा तेरी
कि लें परीक्षा तेरी…….
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है
तू चल, तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है…….
जला के भस्म कर उसे
जो क्रूरता का जाल है
जला के भस्म कर उसे
जो क्रूरता का जाल है
तू आरती की लौ नही
तू क्रान्ति की मशाल है
तू क्रान्ति की मशाल है…….
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है
तू चल, तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है…….
चुनर उड़ा के ध्वज बना
गगन भी कंपकपाएगा
चुनर उड़ा के ध्वज बना
गगन भी कंपकपाएगा
अगर तेरी चुनर गिरी
तो एक भूकंप आएगा
तो एक भूकंप आएगा…….
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है
तू चल, तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है…….