सर्दी जुकाम से झटपट राहत पाने का आसान घरेलू उपाय

सर्दी जुकाम से झटपट राहत पाने का आसान घरेलू उपाय

मित्रों, अगर आप को सर्दी-जुकाम की समस्या है आप नाक बहने से परेशान है, आप को छीके आ रहीं है तो आप इसे ठीक करने के लिए सबसे पहले कुछ घरेलू उपाय आजमा सकते है। आप अंग्रेजी दवाएं न खाये तो ही अच्छा है। ऐंटीबायटिक दवाये आप को जल्दी ठीक तो कर देती है पर इनके बहुत से साइड इफ़ेक्ट होते है। इसीलिए हम आज आपको एक ऐसा घरेलू उपाय बता रहें जिसे प्रयोग करने से सर्दी जुकाम में बहुत जल्दी राहत मिलती है। आपको बस करना ये है कि कुछ तुलसी की पत्ती ले थोड़ी सी अदरक और कालीमिर्च के कुछ दाने इन तीनों को पानी के साथ चाय की तरह खौलाएं आप चाहे तो स्वाद के लिए थोड़ा नमक भी मिला सकते है। जब पानी आधा रह जाये तो इस काढ़े को गुनगुना करके पियें इसे दोपहर व शाम में खाना खाने के एक घंटे बाद लें। आप इसको पीते ही राहत महसूस करेंगे।

जाने तुलसी के बारे में:-

तुलसी – (ऑसीमम सैक्टम) एक द्विबीजपत्री तथा शाकीय, औषधीय पौधा है। यह झाड़ी के रूप में उगता है और १ से ३ फुट ऊँचा होता है। इसकी पत्तियाँ बैंगनी आभा वाली हल्के रोएँ से ढकी होती हैं। पत्तियाँ १ से २ इंच लम्बी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती हैं। पुष्प मंजरी अति कोमल एवं ८ इंच लम्बी और बहुरंगी छटाओं वाली होती है, जिस पर बैंगनी और गुलाबी आभा वाले बहुत छोटे हृदयाकार पुष्प चक्रों में लगते हैं। बीज चपटे पीतवर्ण के छोटे काले चिह्नों से युक्त अंडाकार होते हैं। नए पौधे मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में उगते है और शीतकाल में फूलते हैं। पौधा सामान्य रूप से दो-तीन वर्षों तक हरा बना रहता है। इसके बाद इसकी वृद्धावस्था आ जाती है। पत्ते कम और छोटे हो जाते हैं और शाखाएँ सूखी दिखाई देती हैं। इस समय उसे हटाकर नया पौधा लगाने की आवश्यकता प्रतीत होती है।
तुलसी
तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है और लोग इसे अपने घर के आँगन या दरवाजे पर या बाग में लगाते हैं। भारतीय संस्कृति के चिर पुरातन ग्रंथ वेदों में भी तुलसी के गुणों एवं उसकी उपयोगिता का वर्णन मिलता है। इसके अतिरिक्त ऐलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं में भी तुलसी का किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाता है।

धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ तुलसी औषधीय गुणों से भी भरपूर है। आयुर्वेद में तो तुलसी को उसके औषधीय गुणों के कारण विशेष महत्व दिया गया है। तुलसी ऐसी औषधि है जो ज्यादातर बीमारियों में काम आती है। इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, खॉसी, दंत रोग और श्वास सम्बंधी रोग के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है।

जाने अदरक के बारे में:-

अदरक:- (वानस्पतिक नाम: जिंजिबर ऑफ़िसिनेल / Zingiber officinale), अदरक एक भूमिगत रूपान्तरित तना है। यह मिट्टी के अन्दर क्षैतिज बढ़ता है। इसमें काफी मात्रा में भोज्य पदार्थ संचित रहता है जिसके कारण यह फूलकर मोटा हो जाता है। अदरक जिंजीबरेसी कुल का पौधा है। अधिकतर उष्णकटिबंधीय (ट्रापिकल्स) और शीतोष्ण कटिबंध (सबट्रापिकल) भागों में पाया जाता है। अदरक दक्षिण एशिया का देशज है किन्तु अब यह पूर्वी अफ्रीका और कैरेबियन में भी पैदा होता है। अदरक का पौधा चीन, जापान, मसकराइन और प्रशांत महासागर के द्वीपों में भी मिलता है। इसके पौधे में सिमपोडियल राइजोम पाया जाता है।
अदरक
सूखे हुए अदरक को सौंठ (शुष्ठी) कहते हैं। भारत में यह बंगाल, बिहार, चेन्नई,मध्य प्रदेश कोचीन, पंजाब और उत्तर प्रदेश में अधिक उत्पन्न होती है। अदरक का कोई बीज नहीं होता, इसके कंद के ही छोटे-छोटे टुकड़े जमीन में गाड़ दिए जाते हैं। यह एक पौधे की जड़ है। यह भारत में एक मसाले के रूप में प्रमुख है।

अदरक का इस्तेमाल अधिकतर भोजन के बनाने के दौरान किया जाता है। अक्सर सर्दियों में लोगों को खांसी-जुकाम की परेशानी हो जाती है जिसमें अदरक प्रयोग बेहद ही कारगर माना जाता है। इसके अलावा भी अदरक कई और बीमारियों के लिए भी फ़ायदेमंद मानी गई है।

वनस्पति जगत्‌ में पिप्पली कुल (Piperaceae) के मरिचपिप्पली (Piper nigrum) नामक लता सदृश बारहमासी पौधे के अधपके और सूखे फलों का नाम काली मिर्च (Pepper) है। पके हुए सूखे फलों को छिलकों से बिलगाकर सफेद गोल मिर्च बनाई जाती है जिसका व्यास लगभग ५ मिमी होता है। यह मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है।

इसके दानों में 5 से 9 प्रतिशत तक पिपेरीन (Piperine), पिपेरिडीन (Piperidin) और चैविसीन (Chavicine) नामक ऐल्केलायडों के अतिरिक्त एक सुगंधित तैल 1 से 2.6 प्रति शत तक, 6 से 14 प्रति शत हरे रंग का तेज सुगंधित गंधाशेष, 30 प्रति शत स्टार्च इत्यादि पाए जाते हैं।

जाने काली मिर्च के बारे में:-
काली मिर्च
काली मिर्च:- यह सुगंधित, उत्तेजक और स्फूर्तिदायक होती है। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्साशास्त्रों में इसका उपयोग कफ, वात, श्वास, अग्निमांद्य उन्निद्र इत्यादि रोगों में बताया गया है। भूख बढ़ाने और ज्वर की शांति के लिए दक्षिण में तो इसका विशेष प्रकार का ‘रसम’ भोजन के साथ पिया जाता है। भारतीय भोजन में मसाले के रूप में इसका न्यूनाधिक उपयोग सर्वत्र होता है। पाश्चात्य देशों में इसका विशिष्ट उपयोग विविध प्रकार के मांसों की डिब्बाबंदी में, खाद्य पदार्थो के परिरक्षण के लिए और मसाले के रूप में भी किया जाता है।

Related posts:

गाजर के इतने फायदे है कि आप हैरान रह जायेंगे इन १० को तो जरूर जाने
गले की खराश से तत्काल राहत पाने का घरेलू उपाय
बाबा रामदेव की आयुर्वेदिक दवाइयों और पतंजलि के ब्यूटी प्रोडक्ट्स की लिस्ट
लहसुन के फायदे
लौंग के फायदे एवं उपचार -
आम के पत्ते के 10 ओषधिय फायदे
जानियें दाँतों का पीलापन दूर करने के दस बेहतरीन उपाय
प्रदूषण एक गहन समस्या
सिर्फ पंद्रह दिनों में बालों को लम्बा ,घना व मजबूत कैसें बनाये
सात दिनों में मोटापा कैसे घटाएं
नवरात्रि में दुर्गा माँ को कैसे प्रसन्न करें
जायफल के बेहतरीन फायदे
पेट के कीड़ों को आसानी से समाप्त करने के घरेलु नुस्खे
फाइलेरिया में घरेलु नुस्खों द्वारा कैसे आराम पायें
लौकी के जूस के फायदे
भीगे हुए चने के स्वास्थ्य के प्रति बेहतरीन फायदे
आइब्रो को बनवाते समय किन -किन बातों का ध्यान रखें
भारतीय साड़ी ,एक संस्कृति एक परम्परा
News Reporter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *