लखनऊ।  बच्चों का कान बहना एक बहुत आम समस्या है जिसे आमतौर पर हम बेहद हल्के ढंग से लेते हैं। हम इसके प्रति सचेत तभी होते हैं जब यह समस्या गंभीर रूप धारण कर लेती है। कम सुनाई देना, कान में दर्द या खारिश होना कुछ अन्य आम समस्याएं होती हैं जो किसी न किसी प्रकार कान बहने की समस्या से जुड़ी होती हैं।कान बहने का कारण किसी भी प्रकार का वायरल, वैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन हो सकता है। यह बीमारी जन्म से नहीं होती परन्तु इसके अनेक कारण हो सकते हैं। बाहरी कान में चोट लगने, फोड़ा−फुंसी होने या फंफूद लगने पर कान बहने की समस्या हो सकती है।

1- मेस्टायड खराब होने की स्थिति में बड़ा आपरेशन करना पड़ता है। इसमें लगभग तीन−चार घंटे का समय लगता है। आपरेशन के दो महीने बाद तक रोगी को लगातार जांच भी करवानी पड़ती हैं। यदि मेस्टायड गल जाए तो मरीज का मुंह टेढ़ा भी हो सकता है।
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2- छोटे शिशु को ठीक से लिटाकर दूध न पिलाने के कारण भी मध्य कान में संक्रमण हो जाता है। अधिकांश महिलाएं बच्चे को करवट लिटाकर दूध पिलाती हैं जिससे कई बार दूध मध्यकान में पहुंचकर संक्रमण पैदा कर देता है। जिससे मवाद बनने लगता है।
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3- कभी−कभी दुर्घटनावश सिर में लगी गंभीर चोट से आंतरिक कान को नुकसान पहुंचता है और वह बहने लगता है। वायु प्रदूषण, एलर्जी की समस्याएं, गले में संक्रमण, चिकनपाक्स, मक्स और रूबैला जैसे बुखार, कुपोषण तथा अस्वास्थ्यकर परिस्थितियां भी कान बहने में अहम भूमिकाएं निभाती हैं। कई बार दांतों का इंफेक्शन भी कान बहने का कारण बन सकता है।
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4- कान बहने की समस्या के गंभीर परिणामों से बचने के लिए जरूरी है कि कानों की छोटी−मोटी समस्याओं को भी नजरअंदाज न किया जाये। शिशुओं को दूध पिलाते समय उनका सिर 45 डिग्री कोण पर गोद में ऊंचा रखें। जुकाम, नजला, टांसिल्स या गले की कोई समस्या होते ही बिना समय गवाएं डॉक्टर से तुरन्त सलाह लेनी चाहिए।
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5- यदि ऐडीनायडस अथवा टांसिल्स के कारण इंफेक्शन हो तो उसे दवा देकर ठीक किया जा सकता है। इससे भी यदि स्थिति न सुधरे तो इंफेक्टेड एडिनायड तथा टांसिल्स को आपरेशन द्वारा निकाल दिया जाता है और बाहरी दवा और खाने वाली दवा के द्वारा कान सुखा दिया जाता है। कान के पूरी तरह सूख जाने के बाद तथा रोग की आक्रामकता शांत हो जाने के बाद आपरेशन द्वारा पर्दे के सुराख को बंद कर दिया जाता है।
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6- कान के बाहर या भीतर पानी जैसे रंगहीन तरल पदार्थ या मवाद या खून के रिसाव को ही आम बोलचाल की भाषा में कान बहना कहते हैं। कान बहने का शिकार कोई भी व्यक्ति हो सकता है परन्तु बच्चों, कुपोषित लोगों, मियादी बुखार के रोगियों तथा तैराकों में इसके होने की संभावना ज्यादा होती है।
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7-  कान का पर्दा फटने पर दो प्रकार से संक्रमण होता है। पहला कान के पर्दे में सुराख द्वारा और दूसरा पर्दे के साथ−साथ मध्यकान की हड्डी का भी संक्रमित हो जाना। कान और मस्तिष्क के बीच एक पतली सी हड्डी होती है। जब पर्दे के किनारे पर सुराख होता है तब इंफेक्शन मेस्टायड यहां से संक्रमण रक्त वाहिनियों के रास्ते मस्तिष्क, उसे घेरने वाली झिल्ली, फेशियल नर्व तथा आंतरिक सतह तक पहुंच सकता है। इससे मस्तिष्क की सूजन, चेहरे की मांस पेशियों में लकवा, चक्कर आना और पूर्व बधिर होने जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
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