मिर्गी एक नाडीमंडल संबंधित रोग है जिसमें मस्तिष्क की विद्युतीय प्रक्रिया में व्यवधान पडने से शरीर के अंगों में आक्षेप आने लगते हैं। दौरा पडने के दौरान ज्यादातर रोगी बेहोंश हो जाते हैं और आंखों की पुतलियां उलट जाती हैं। रोगी चेतना विहीन हो जाता है और शरीर के अंगों में झटके आने शुरू हो जाते हैं। मुंह में झाग आना मिर्गी का प्रमुख लक्षण है ! दुनिया भर में पांच करोड़ से ज्यादा लोग मिर्गी के शिकार हैं।

मिर्गी का दौरा पड़ने का मुख्य कारण अधिक मानसिक दबाव या शारीरिक कार्य करना होता है, किन्तु ये सिर पर चोट लगने, ज्यादा शराब का सेवन करने, तेज बुखार के होने, ब्रेन ट्यूमर होने, लकवे, आनुवांशिक, ज्ञान तंत्रों में ग्लूकोस के कम होने, तंत्रिका तंत्र के कमजोर होने, पाचन तंत्र में खराबी होने, आंव आने, कर्मी रोग, मासिक धर्म में गड़बड़ी होने और मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी होने इत्यादि कारणों की वजह से होता है। .

MIRGI KO DOOR KARNE KE GHARELU UPCHAAR

आइये जानते है की मिर्गी के उपचार के लिए हम कौन -कौन से तरीके अपना सकतें है –

बकरी के दूध में मेहंदी के पत्तों का रस पीसकर मिलाकर पिलाने से मिर्गी के दौरे आना बंद हो जातें है तथा रोगी को आराम मिलता है ।

करौंदे के पत्तों की चटनी को रोगी को खिलाएं ऐसा करने से रोगी को आराम मिलेगा तथा दौरे पढना बंद हो जायेंगे।

पीपल या बरगद की जड़ को उबालकर पिलाने से मिर्गी के रोगी को बेहद आराम मिलता है ।

रोजाना तुलसी के पत्तों का सेवन करने से मिर्गी में गिरावट आती है ।

एक गिलास दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर इसमे लहसुन कि कुछ कलियों को कुच -कुचाकर उबालकर आधा हो जाने पर हर रात सोने से पहले यदि रोगी को पिलाया जाए तो उसे मिर्गी में आराम मिलेगा।

रोगी को होश में आने के बाद शहतूत और सेब का रस निकालकर उसमें थोड़ी हिंग मिलाकर खिलानी चाहियें ताकि दौरे का प्रभाव शीघ्र खत्म हो सके और वो जल्द ही सामान्य हो जाए।

गाय के दूध से बनाया हुआ मक्खन मिर्गी में फ़ायदा पहुंचाने वाला उपाय है। दस ग्राम प्रतिदिन खाने से मिर्गी में आराम मिलता है ।

रोगी को पानी में पीसी हुई सरसों , कपूर, तुलसी रस, लहसुन रस, आक की जड़ की छाल का रस, नीम्बू रस व हिंग में से किसी भी चीज को सुंघाया जा सकता है ऐसा करने से रोगी को आराम मिलेगा । 

 

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