रक्त में लाल कणों की आयु 120 दिन होती है। किसी कारण से यदि इनकी आयु कम हो जाये तथा जल्दी ही अधिक मात्रा में नष्ट होने लग जायें तो पीलिया होने लगता है। रक्त में बाइलीरविन नाम का एक पीला पदार्थ होता है। यह बाइलीरविन लाल कणों के नष्ट होने पर निकलता है तो इससे शरीर में पीलापन आने लगता है। जिगर के पूरी तरह से कार्य न करने से भी पीलिया होता है।

पीलिया लीवर से सम्बंधित रोग है, इस रोग में रोगी की आँखे पीली पड़ जाती हैं, पेशाब का रंग पीला हो जाता है, अधिक तीव्रता होने पर पेशाब का रंग और भी खराब हो जाता है, पीलिया दिखने में बहुत साधारण सी बीमारी लगती है, मगर इसका सही समय पर इलाज ना हो तो ये बहुत भयंकर परिणाम दे सकती है, रोगी की जान तक जा सकती ।है इसमें  आज हम आपको इस जानलेवा बीमारी का एक ऐसा रामबाण उपचार बता रहे हैं।

piliya

पीलिया से बचने के घरेलु उपाय –

आकड़े की 1 ग्राम जड़ को शहद में मिलाकर खाने अथवा चावल की धोवन में घिसकर नाक में उसकी बूँद डालने से पीलिया में लाभ होता है।

शुद्ध शिलाजीत में केसर और मिश्री को मिलाकर बकरी के दूध के साथ सेवन करने से कफज पाण्डु (पीलिया) रोग दूर होता है।

प्याज का प्रयोग पीलिया के उपचार में बेहद उपयोगी है। प्याज छील कर इसे बारीक़ काटे फिर पीसी हुई काली मिर्च, थोड़ा काला नमक और नींबू का रस इसमें मिलाकर हर रोज दिन में सुबह शाम सेवन करे।

गिलोय, अड़ूसा, नीम की छाल, त्रिफला, चिरायता, कुटकी को बराबर मात्रा में लेकर जौकुट करके एक कप पानी में पकाकर काढ़ा बनाएं। फिर इसे छानकर थोड़ा-सा शहद मिलाकर पी जाएं। 20 दिन तक इसका सेवन पीलिया के रोगी को कराने से आराम मिलता है।

गन्ने के टुकड़े करके रात के समय घर की छत पर ओस में रख देते हैं। सुबह मंजन करने के बाद उन्हे चूसकर रस का सेवन करें। इससे 4 दिन में ही पीलिया के रोग में बहुत अधिक लाभ होता है

पुदीने के पत्तों को पीसकर मिश्री के साथ लेने से आराम मिलता है

एक कप मट्ठे में काली मिर्च एक चुटकी डालकर पीने से आराम मिलता है यह क्रम लगातार एक सप्ताह करें

जॉन्डिस ठीक करने में टमाटर का प्रयोग भी अच्छा उपाय है। एक गिलास टमाटर जूस में नमक और थोड़ी सी काली मिर्च मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से चमत्कारी तरीके से फायदा मिलता है।

गुड़ और पीसी हुई सौंठ मिला ले और ठंडे पानी के साथ लेने से इस रोग में आराम मिलता है।

. निम्बू का रस पीलिया में काफी फायदेमंद है। पीलिये से ग्रस्त मरीज को प्रतिदिन नींबू का रस पंद्रह से बीस एम एल दो से तीन बार पीना चाहिए। नींबू की शिकंजी बना कर पीना भी अच्छा है।

पुनर्नवा की जड़ को साफ करके छोटे-छोटे टुकड़े काट लें। उन 21 टुकड़ों की माला बनाकर रोगी के गलें में पहना दें। पीलिया ठीक होने के बाद उस माला को किसी पेड़ पर लटका दें।

8 ग्राम कपास की मिंगी को रात को पानी में भिगो दें। सुबह इसे घोटकर और छानकर इसमें थोड़ा-सा सेंधानमक मिलाकर पीने से पीलिया दूर हो जाता है।

जामुन के रस में जितना सम्भव हो, उतना सेंधानमक डालकर एक मजबूत कार्क की शीशी में भरकर 40 दिन तक रखा रहने दें। इसके बाद आधा चम्मच की मात्रा में रोगी को सेवन कराने से पीलिया में लाभ होगा।

 

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