जब भी निराश हो सकारात्मक सोंचे | Power of positive attitude

सभी की जिन्दगी में एक वक्त ऐसा आता है। जब हम परस्थितियों से हार मान जातें है । उस समय हमें निराश न होकर हमें धैर्य रखना चाहिये और ये सोचना चाहियें की हमसें ऐसी गलती कहाँ पर हुई जो हमारी असफलता का कारण बनी ताकि हम अपनी गलती सुधार सकें और पुनः प्रयास कर  सकें क्योंकि हर  गलती  हमें कुछ नया सिखाती है। और हर गलती के पीछे हमारे लिये कुछ अच्छा ही छिपा होता है। पर उस समय हमें  जरूरत होती है की हम नकारात्मकता को न देखते हुये उसके पीछे छिपे हुए सकारात्मक  कारण को खोजें शायद उसके आगे कुदरत ने हमारें लिए इससे भी अच्छा सोच  रखा हो कहतें है हमारी जिन्दगी में जो भी होता है जैसे कोई आ के चला जाता है या अचानक से हमारी जिन्दगी में कोई घटना घटती है जो भी होता है किसी न किसी कारणवश  ही होता है बस हमें जरूरत होती है उनसे सबक लेने की कई बार हम सोचतें कुछ है और हो कुछ और ही जाता है। उस समय हमें उदास नहीं होना चाहियें क्योंकि  हमारी लाइफ में  हमेशा वो नहीं होता जो हम चाहतें है बल्कि वो होता है जो हमारें लिये अच्छा होता है । हमे उस  समय उन  पलों को याद करना चाहियें जो हमने अपनों के साथ हँस कर  बिताएं है।

positiv -thinking

जब भी आप निराश हो तो सकारात्मक सोंचे सकारात्मक सोंच में वो ताकत होती है। जो हर चुनौती को मुह तोड़ जवाब दे सकती है एक सकारात्मक सोंच हर मुश्किल का हल होती है। यदि हम चाहें तो सकारात्मक सोंच के द्वारा गहरी से गहरी निराशा से भी उबर सकतें है और अवसाद जैसी बिमारियों का शिकार होने से बच सकतें है । शायद एक सकारात्मक सोंच में आपको उम्मीद की वो  किरन नजर आ जाएँ जो हमें सफलता की सीढ़ियों तक पहुचा दें जरूरी नहीं की हर बार जो हम निराश हो रहें है। तो क्यूँ न अगली बार हम उस मंजिल तक जाने का रास्ता ही बदल दें।

जब भी निराश हो तो प्रसिद्ध वैज्ञानिक ए .पी .जे के इन वाक्यों को याद करें—

1.i am the best .

2. i can do it .

3. god is always with me .

4. today is my day .

5. i am a winner .

सकारात्मक सोंचे —

ब्रम्हांड कभी हमारा बुरा नहीं सोचता वो हमेशा हमारा अच्छा ही सोचता है।

जो हम कहतें है ,सोचतें है वो आज नहीं तो कल वो हो जाता है।

मैं अपने आने वाले समय से नहीं डरता क्योंकि मैंने अपना बीता हुआ समय देखा है और मैं अपने आज को पसंद करता हूँ।

लोगो में थोड़ा सा अंतर होता है लेकिन यह थोड़ा सा अंतर बहुत अंतर डाल देता है। यह थोड़ा सा अंतर नजरिये का होता है की वह नकारात्मक है या सकारात्मक।

 

News Reporter

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