आज के दौर में जहां पैसों का इतना महत्व है, तो यह और भी ज़रूरी हो जाता है की हम अपने रिश्तों को कैसे संभालते है। क्यूंकि आज के समय में हमारे जीवन में जितना पैसों का महत्त्व है । उतना ही रिश्तों का भी महत्त्व होना चाहिये लेकिन कहीं न कहीं हम पैसों को कमाने के चक्कर में हम अपने रिश्तों को भूलते चले जाते हैं पर अब ये सवाल उठता है । कि हमने अपने जीवन में  पैसे तो बचा लिए, लेकिन क्या हम रिश्ते बचाए ?

riston ki ahmiyt

रिश्ते भी क्या अनोखे होते ; कभी रास्ते पर चलते-चलते रिश्ते  बन जाते और कभी रिश्ते निभाते-निभाते रास्ते बदल जाते ,रिश्ते और रास्ते एक ही सिक्के के दो पहलु हैं । ! रिश्ते की क्या कीमत अदा करू विपत्ति पर सबसे पहले अपने ही याद आते तभी रिश्तो की अहमियत महसूस  होती है। , रिश्ते निभाना भी एक अदाकारी हैं ; फुलो को धागे से बाँधे रखना उदाहरण हैं , ये रिश्ते है  ,जो निभाने से निभ जाते है  रिश्ते तो हमारे लिए  दर्पण होते जिनको निभाओ तो सुरत दिखातें है ।

बचपन एक ऐसा दौर है जिसको हम बड़े प्यार से पीछे मुड़ कर देखा करते हैं। वो ऐसा वक्त होता है जब जिंदगी छोटी-छोटी खुशियों से भरी और जिम्मेदारियों से खाली होती है। मगर जरा गहराई से सोच कर देखिए कि  आज के समय में ऐसा क्या हो गया  जो हम रिश्तों को अपनी जिन्दगी में पीछे छोड़तें चले जा रहे है। या उन्हें निभाना ही नहीं चाहतें है पैसे तो हर कोई कमा लेता है । लेकिन  रिश्तें कमाना तो  बड़ी बात होती है । जीवन में पैसे चाहे जितने कम लो पर एक वक्त ऐसा आता है । जब हमें पैसों की नहीं रिश्तों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है ।

रिश्तें हमें बचपन में तोहफे के रूप में मिले वो सौगात होते है। जिनकी कोई कीमत नहीं होती है। ये बहुत अनमोल होते है । और हमें इनकी कीमत तब पता चलती है । जब हमे उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। और वे हमारे साथ खड़े होतें है । जब हम निराश होते है। तो हमें वे हौसला देतें है। सोचिये वो लोग कितने खुशकिस्मत होते है । जिनके पास रिश्तों का एक बहुत बड़ा पिटारा सा होता है । जरा उन लोगो से रिश्तों की कद्र पूछिए जिनके पास कोई रिश्तें नहीं होतें है। जो रिश्तों के बिना उनको बोझ नहीं ,वरदान समझिये उनकी कद्र कीजिये ।

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