प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले स्वस्तिक चिन्ह दीवार, थाली या ज़मीन पर बनाकर उसकी पूजा की जाती है| इसे शुभ मंगल का प्रतीक कहा गया है| स्वस्तिक शब्द ‘सु’ एवं ‘अस्ति’ के मिश्रण से बना है, सु का अर्थ होता है- शुभ और अस्ति का अर्थ- होना अथार्त ‘शुभ होना’ और ‘मंगल होना’| स्वस्तिक चिन्ह भगवान श्री गणेश जी का स्वरुप है, जो अमंगल और सभी विघ्न बाधाएं दूर करता है| जातक की कुण्डली बनाते समय या कोई मंगल व शुभ कार्य करते समय सर्वप्रथम स्वस्तिक को ही अंकित किया जाता है शुभ कार्य के दौरान स्वास्तिक को पूजना अति आवश्यक माना गया है। लेकिन असल में स्वस्तिक का यह चिन्ह क्या दर्शाता है, इसके पीछे ढेरों तथ्य हैं। स्वास्तिक में चार प्रकार की रेखाएंहोती हैं, जिनका … बौद्ध धर्म में स्वास्तिक. हिन्दू धर्म के अलावा स्वास्तिक का और भी कई धर्मों में महत्व है। बौद्ध धर्म में स्वास्तिक को अच्छे भाग्य का प्रतीक माना गया है। यह भगवान बुद्ध के पग चिन्हों को दिखाता है, इसलिए इसे पवित्र माना जाता है।

svastic

स्वस्तिक में एक दूसरे को काटती हुई दो सीधी रेखाएँ होती हैं, जो आगे चलकर मुड़ जाती हैं। इसके बाद भी ये रेखाएँ अपने सिरों पर थोड़ी और आगे की तरफ मुड़ी होती हैं। स्वस्तिक की यह आकृति दो प्रकार की हो सकती है। प्रथम स्वस्तिक, जिसमें रेखाएँ आगे की ओर इंगित करती हुई हमारे दायीं ओर मुड़ती हैं। इसे ‘स्वस्तिक’ कहते हैं। यही शुभ चिह्न है, जो हमारी प्रगति की ओर संकेत करता है। दूसरी आकृति में रेखाएँ पीछे की ओर संकेत करती हुई हमारे बायीं ओर मुड़ती हैं। इसे ‘वामावर्त स्वस्तिक’ कहते हैं।

आइये जानते शुभ स्वस्तिक के चमत्कारी फायदे —

यदि घर में पैसों की तंगी होती है तो आप सिंदूर या कुमकुम के स्वास्तिक चिन्ह को घर के बाहर बनाएं। एैसा करने से लक्ष्मी जी की कृपा आपके उपर बनती है। और पैसों की कमी दूर होती है।

घर के बाहर कुमकुम, सिंदूर या रंगोली से बना स्वस्तिक शुभ होता है। इससे घर में देवी-देवताओं का आगमन होता है।

आप सात गुरूवार घर के उत्तर पूर्वी कोनों पर गंगाजल डालें और वहां पर स्वास्तिक चिन्ह बनाएं। और गुड़ का प्रसाद भी चढ़ाएं। इस उपाय से व्यापर में तरक्की होती है।

स्वस्तिक बनाकर उसके ऊपर जिस देवी-देवता की प्रतिमा रखी जाए वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। अपने इष्ट देव का पूजन करने वाले उस स्थान पर स्वस्तिक का चिन्ह अवश्य बनाएं।

यदि आप मनोकामना पूरी करना चाहते हैं तो किसी भी मंदिर में कुमकुम या गोबर का उल्टा स्वास्तिक चिन्ह बना लें और जैसे ही आपकी मनोकामना पूरी हो जाए तब आप मंदिर में सीधा स्वास्तिक बनाएं।

घर में गोबर से स्वस्तिक बनाएं। इसे घर में शांति, शुभता और समृद्धि आती है। इसके साथ ही पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है।

धन प्रप्ती चाहते हैं तो अपने घर की देहलीज की दोनों तरफ स्वास्तिक चिन्ह बना लें और उसके उपर मौली के धागे से बंधी हुई एक एक सुपारी स्वास्तिक के उपर रख दें।

उत्तर-पूर्व में उत्तर दिशा की दीवार पर हल्दी से स्वस्तिक बनाएं। ऐसा करने से घर में सदैव सुख-शांति का माहौल बना रहता है।

 

 

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