गले के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ मांस की एक गांठ सी होती है, जो लसिका ग्रंथि के समान होती है जिसे टांसिल कहते हैं। गले में छोटे-छोटे गोल कृत आकार मांसल तन्तु टॉन्सिल कहलाते हैं। इनमें पैदा होने वाले शोथ (सूजन) को टाँन्सिलाइटिस कहा जाता है। टांसिल बढ़ने का कारण-मैदा, चावल, आलू, चीनी, ज्यादा ठंडा, ज्यादा खट्टी चीजों का जरूरत से ज्यादा प्रयोग करना टांसिल के बढ़ने का मुख्य कारण है। ये सारी चीजें अम्ल  को बढ़ा देती है।

टॉन्सिल्स की समस्या बढ़ जाये और अगर हम डॉक्टर से सलाह करे तो हमे ऑपरेशन की सलाह दी जाती है, पर टॉन्सिल्स का इलाज देसी आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों से भी किया जा सकता है। ये समस्या अधिकतर छोटे बच्चों में पायी जाती है। आइये जाने की कैसे इस बीमारी से बचा जा सकता है और कौन से घरेलु इलाज टॉन्सिल्स की बीमारी कोदूर करने में आपकी मदद करेंगे ।

taansil ka gharelu upchaar

आइये जानते है टांसिल का घरेलु उपचार कैसे करें –

कच्चे पपीते के हरे भाग को चीरकर उसका दूध निकालकर 1 चम्मच दूध को 1 गिलास गुनगुने पानी में डालकर गरारें करें। इससे टॉसिल में लाभ मिलता है।

टॉन्सिल्स तथा गलगंड में गाजर का रस प्रतिदिन तीन चार बार  दिन में 125 ग्राम  लगातार दो तीन मास तक पियें।

लहसुन की एक गांठ को पीसकर पानी में मिलाकर गर्म करके उस पानी को छानकर गरारे करने से टांसिल के बढ़ने की बीमारी में लाभ मिलता है।

टॉन्सिल की सूजन में केवल गर्म पानी 200 ग्राम में आधा चम्मच नमक डालकर गरारे करने से आराम आ जाता है। दिन में दो तीन बार नमक से गरारा करना चाहिये ।

टांसिल के बढ़ जाने पर अनन्नास का जूस गर्म करके पीने से लाभ होता है।

2 चुटकी पिसी हुई हल्दी, आधी चुटकी पिसी हुई कालीमिर्च, और 1 चम्मच अदरक के रस को मिलाकर आग पर गर्म कर लें और फिर शहद में मिलाकर रात को सोते समय पीने से 2 ही दिन में टांसिल की सूजन दूर हो जाती है।

देसी घी की मालिश करने से टांसिल में आराम मिलता है ।

गले में दर्द होने पर गर्म पानी में फिटकरी और नमक डालकर गरारे करने से टांन्सिल  ठीक होते हैं। इसके अलावा मुंह, गला और दांत साफ होते हैं।

कालीमिर्च, कूट, सेंधानमक, पीपल, पाढ़ और केवरी मोथा को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और एक शीशी में भर लें। इसके बाद इसे शहद में मिलाकर बाहरी गालों और कंठ पर लेप करें।

मालकांगनी, हल्दी, पाढ़, रसौत, जवाखार और पीपल को बराबर लेकर पीस लें फिर इसमें शहद मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर रोजाना 2 गोली चूसने से टांसिल में आराम आता है।

कड़वी तोरई को चिलम में रखकर तम्बाकू की तरह उसका धुंआ गले में लेकर लार टपकाने से गले की सूजन दूर हो जाती है।

निर्गुण्डी की जड़ चबाने से, नीम के काढ़े से कुल्ला करने से या थूहर का दूध टांसिल पर लगाने से टांसिल समाप्त हो जाते हैं।

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