एक अच्छे समाज का निर्माण  तभी होता है जब उस समाज में रहने वाले लोग पूर्णतया शिक्षित हो और उनकी मानसिकता भी शिक्षा के अनुसार ही प्रभावशाली हो… ऐसा तभी सम्भव हो पाता है जब उस समाज में रहने वाले स्त्री और पुरुष समान रूप से शिक्षित हो हमारे प्राचीनकाल के महापुरुषों ने भी यही कहा है यदि पुरुष रक्षक  है तो नारी उसकी ढाल  है। दोनों ही समाज में बराबर के भागीदार  है ।तो क्यों आज के इस  बदलते समय  मे नारी आज भी बन्धनों से बंधी हुई है माना की आज हमारे देश की नारियां आसमान छू  रही है हर मंजिल  पे लड़कों से कही आगे जा रही है  ।पर मुख्य तौर यदि हम ध्यान दे तो आज भी उन पर कई बंदिशें है जो कहीं न कही हमारे द्वारा ही लगायी है पर उन लाख  बंदिशों के बाद भी वो उड़ान भर  रही है  जिसे देखकर कोई भी व्यक्ति फूला नहीं समाता होगा पर इन  सभी के बावजूद यदि एक बार हम खुद से सवाल करें तो शायद इस  सवाल का जवाब हमें हमारें पास से ही मिलें 

naari shiksha

यदि हम बात करें तो एक लड़की के लियें किसी भी मंजिल पर पहुचनें से पहले उसे बहुत सारे सवालों पर सोचना पड़ता है उसे हर  कदम आगे बढ़ाने  से पहले दस बार सोचना पड़ता है और एक लड़की के लियें उसके परिवार वालों का उसको सपोर्ट न करना ही उसके लियें बड़ी बात होती है और उसको निराश  करती है और यदि हम एक समय के लिये इस बात पर गौर करें एक शहर की लड़की और एक गाँव की लड़की में क्या अन्तर  है तो हमें ये मानना पड़ेगा की एक शहर की लड़की को कुछ नहीं तो समाज के डर से उसके माता -पिता उसको शिक्षित करतें है और वो कुछ न कुछ अपने विषय में भी जागरूक होती है क्योकि हमारे आस -पास के वातावरण का हमारें ऊपर बहुत फ़र्क पड़ता है पर यदि हम बात करें गाँव की लड़की की तो शायद ये कहना उचित होगा की आज भी उनको पूर्णरूप से शिक्षित नहीं किया जाता है और शिक्षा के अभाव में कभी -कभी वो अपने विषय के सही -गलत का चुनाव नहीं कर  पाती ।वो कभी अपने मनोबल को मजबूत कर आत्मनिर्भर  नहीं हो पाती कभी किसी गलत रुढियों रीति -रिवाजो का विरोध नहीं कर  पाती है और बेवजह आडम्बरों में फसती ही जातीं है उनको शिक्षित न कराकर छोटी सी उम्र में उन्हें पाबंदियों के साथ -साथ जिम्मेदारियां भी दी  जाती है और बाल -विवाह जैसी कुप्रथाओं से जकड़ा  जाता है और फिर से एक बार बाल -विवाह जैसी कुप्रथाओं को जन्म  दिया जाता है

वैसे तो हमारी भारत सरकार ने इस प्रकार की कुप्रथाओं को रोकने के लिए कई  नियम बनायें है और उसके अनुसार दंड भी निश्चित किया है पर माज के लोग इन कुप्रथाओं को देखते हुये भी इनका विरोध नहीं करतें है जिससे इन कुप्रथाओं को बढ़ावा मिलता है और कई बुराइयों को भी बढ़ावा मिलता है जैसे —

कोई माने या न माने पर समाज में आज भी लड़के -लड़कियों का भेदभाव होता है

गाँव के समाज में लड़कियों की शिक्षा में आज भी पाबन्दियाँ लगती है

उनको अपने फैसले लेने का कोई अधिकार नहीं होता

लड्कियों  के सपनों को कोई महत्त्व नहीं दिया जाता है

Please follow and like us:
error

Related posts:

क्या आप को पता है, कॉम्बीफ्लेम टैबलेट किस तरह से आप के शरीर को खोखला बनाती है
सर्दी जुकाम से झटपट राहत पाने का आसान घरेलू उपाय
गले की खराश से तत्काल राहत पाने का घरेलू उपाय
एक मिनट में कारगर फोड़े फुंसी का घरेलू उपचार || Phode Funsi Ka Ghareelu Ilaj
बाबा रामदेव की आयुर्वेदिक दवाइयों और पतंजलि के ब्यूटी प्रोडक्ट्स की लिस्ट
हरी धनिया के फायदे एवं उपयोग
गाय के दूध के फायदे -और उपचार
घर पर फिंगर चिप्स कैसे बनायें
कच्चे केले के चिप्स कैसे बनाये
घर को सजाये कैसे
शिमला मिर्च के प्रयोग तथा गुण
लौंग के फायदे एवं उपचार -
हिंदी हमारी पहचान
जानियें दाँतों का पीलापन दूर करने के दस बेहतरीन उपाय
संतरे के फायदे तथा उपचार --
सात दिनों में मोटापा कैसे घटाएं
अरण्डी के तेल के बेहतरीन फायदे
नकसीर को घरेलु नुस्खों द्वारा कैसे समाप्त करें